क्यों पढ़े आरोग्य आपका   ?

स्वस्थ रहें या रोगी?: फैसला आपका

स्वावलम्बी अहिंसक चिकित्सा

( प्रभावशाली-मौलिक-निर्दोष-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियाँ )

अभिमत !


आरोग्य आपका पुस्तक को यदि एक बार पढ़ना शुरु कर दिया जाता है तो, छोड़ने को मन नहीं करता। प्रत्येक अध्याय में नया-नया स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन मिलता है। मैं कहना चाहूँगा कि लेखक ने विभिन्न 40 पुस्तकों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एक ही पुस्तक में समेट लिया है। So, it is better to carry or to have one book ‘‘आरोग्य आपका” rather than to carry 40 books weighing 40 kg.

-Dr. R.C. Sharma (Ph.D.), Fruit Technologist, H.P.Fruit Canning Unit, Kangra (H.P.)

भारत के छः लाख गांवों के लिये कैसी चिकित्सा पद्धति होनी चाहिये। मेरे इस प्रश्न का जवाब यह पुस्तक है। इस पुस्तक का गांव-गांव, शहर-शहर, घर-घर प्रचार होना चाहिये। इस पुस्तक के आधार पर जगह-जगह प्रशिक्षण व चिकित्सा केन्द्र खुलने चाहिये। इन स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियों को हमारी राष्ट्रीय पद्धति घोषित कर भारत सरकार को इसका प्रचार एवं प्रसार करना चाहिये। ‘‘आरोग्य आपका” रेगिस्तान की तपती गर्मी में ठंडी हवाओं के झोंके के समान है।

-मुरारीलाल सर्राफ, सर्वोदय विचार परिषद्, महात्मा गांधी रोड़, कलकता

सर्वप्रथम तो यह आश्चर्य ही लगता है कि इतनी सब सात्विक, स्वावलम्बी, अहिंसक तथा सरल चिकित्सा पद्धतियों के उपलब्ध होते हुये भी हम अनभिज्ञ तथा वंचित रह रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों से भरी यह पुस्तक हीरों की खान से कम नहीं है। ऐलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली में स्नातक होते हुये भी इस पुस्तक को पढ़कर यह महसूस करता हूँ कि हमारा ज्ञान अभी भी काफी कम है। श्री चंचलमलजी चोरडिया साहब का यह प्रयास निसंदेह एक मील का पत्थर साबित होगा। आपके तर्कपूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण सचमुच मस्तिष्क को यह मानने पर मजबूर करते हें कि आज के इस युग में स्वस्थ रहने का इससे सरल और सस्ता रास्ता कोई नहीं है। इससे से कई सरल चिकित्सा का उपयोग मैंने स्वयं किया तथा अपने कई मरीजों को करने की सलाह दी तथा खुशी का एहसास हुआ जब उनसे मुझे तथा मरीजों को काफी फायदा हुआ। अतः अब तक तो यह बात अनुभव सिद्ध भी हो गयी है कि इस तरह की पुस्तकों का संग्रह प्रत्येक घर में होना चाहिये। एक तरह से यह पुस्तक धार्मिक, आध्यात्मिक तथा चिकित्सा का ऐसा समन्वय है कि इसे पढने के बाद एक सफल सरल जीवन शैली जीने की राह का मार्गदर्शन होता है। सही में यह पुस्तक आरोग्य आपका नहीं बल्कि आरोग्य हमारा या आरोग्य हम सबका है।

-डाँ महेन्द्र इन्द्रचंद जैन (M.B.B.S.), मुम्बई (महा.)

आरोग्य आपका जैसी पुस्तक मैंने अपने जीवन में पहली बार देखी, जिसमें शरीर के किसी भी रोग का इलाज भांति-भांति से ठीक करने की विधियाँ बताई गई है। इसमें मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ अध्यात्म, मनोविज्ञान तथा आधुनिक जीवन शैली को दृष्टि से रखकर शारीरिक रोगों का कारण एवं उपचार करने का व्यवहारिक तरीका बताया गया है। यह पुस्तक ऐसी है जिसको जितना पढ़ते हैं और अधिक पढ़ने की चाह बढ़ती जाती है। पुस्तक में सर्वत्र मौलिक, वैज्ञानिक आध्यात्मिक तथा तर्क संगत प्रस्तुतिकरण है।

-खुशबु मोदी (M.B.B.S.), अहमदाबाद

मेरे मन में Alternative Medicines को जानने, समझने व परखने की अटूट जिज्ञासा थी। आरोग्य आपका ने बहुत सारी शंकाओं का समाधान प्रदान कर मुझे एक नई दिशा दी है। इसके लिये मैं लेखक का अन्तरमन से साधुवाद करता हूँ। कोई भी बुद्धिमान इस पुस्तक का गहन, सजगता से अध्ययन किये बिना नहीं रह सकता। यह मेरी सोच है और इसके बहुत अच्छे परिणामों की भविष्यवाणी भी करता हूँ। खुली किताब परीक्षा के जरिये पाठकों को इसका गहराई से पूरी विवेक व सजगता से अध्ययन करवा लेखक ने स्वावलंबी, प्रभावशाली, अहिंसा और ध्यान साधना के लिये प्रेरित कर मुख्य भूमिका निभाई है।

-प्रो. हरबंस सिंह MBBS, MS, Ph.D, वरिष्ठ शल्य चिकित्सक, कोठारी मेडीकल एवं रिसर्च इन्स्टीट्यूट, बीकानेर (राज.)

मेरे मन में Alternative Medicines को जानने, समझने व परखने की अटूट जिज्ञासा थी। आरोग्य आपका ने बहुत सारी शंकाओं का समाधान प्रदान कर मुझे एक नई दिशा दी है। इसके लिये मैं लेखक का अन्तरमन से साधुवाद करता हूँ। कोई भी बुद्धिमान इस पुस्तक का गहन, सजगता से अध्ययन किये बिना नहीं रह सकता। यह मेरी सोच है और इसके बहुत अच्छे परिणामों की भविष्यवाणी भी करता हूँ। खुली किताब परीक्षा के जरिये पाठकों को इसका गहराई से पूरी विवेक व सजगता से अध्ययन करवा लेखक ने स्वावलंबी, प्रभावशाली, अहिंसा और ध्यान साधना के लिये प्रेरित कर मुख्य भूमिका निभाई है।

-प्रो. हरबंस सिंह MBBS, MS, Ph.D, वरिष्ठ शल्य चिकित्सक, कोठारी मेडीकल एवं रिसर्च इन्स्टीट्यूट, बीकानेर (राज.)

मौलिक चिकित्सा पद्धतियाँ ही श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धतियाँ है क्योंकि इसमें अन्तःश्रावी ग्रन्थियों का सरलतम प्रभावशाली उपचार संभव है, जो अन्य चिकित्सा पद्धतियों में इतना सरल नहीं। पुस्तक प्रत्येक स्वास्थ्य प्रेमी के लिये पठनीय एवं स्वास्थ्य संबंधी रोगों का समाधान देने वाली है।

-Prerna Kothari, 6th Floor, Flat No. 81, Southsea Mansion, Chatham Road, T.S.T. Hongkong

दुनियाँ के हर पेथी के प्रत्येक डाॅक्टर को कम से कम एक बार इस विशिष्ट स्वावलम्बी आरोग्य आपका ग्रन्थ को अवश्य पढ़ लेना चाहिये तथा जो मरीज अस्पताल में भरती हों उसको यह ग्रन्थ पढ़ने को देना चाहिये। मैं यह कहना चाहूँगा- ‘‘आरोग्य आपका है यदि आपके हाथ में, तो अच्छा स्वास्थ्य है आपके साथ में।”

-डाॅ. लक्ष्मीचन्द जैन (एम.ए.बी.एड.), ग्राम-पोस्ट-छोटी कसरावद, जिला-खरगोन (मध्यप्रदेश)

आरोग्य आपका पुस्तक को यदि Mini M.B.B.S. का पाठ्यक्रम भी कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं। वास्तव में सरल भाषा में घरेलू उपचार के माध्यम से हम स्वस्थ रह सकते हैं। मेरे विचार से तो इस पुस्तक को माध्यमिक स्तर तर के स्कूली पाठ्यक्रम का एक जरूरी हिस्सा बना दिया जाना चाहिये ताकि प्रत्येक व्यक्ति में स्वावलंबी चिकित्सा के प्रति जागरूकता पैदा हो जाये।

-सुरेश बंसल (B.Com.), बजाजा बजार, नारनौल (हरियाणा)

शायद आरोग्य आपका पुस्तक 10 साल पहले मुझे प्राप्त हुई होती तो जीवन की राह में अनूठा बदलाव आता। मैंने एक डाॅक्टर होने से अपने G.P. में मरीजों को आपकी पुस्तक से प्राणायाम, शिवाम्बु, सौर ऊर्जा, खान-पान आदि का महत्त्व समझकर उन्हें अपनाने को प्रोत्साहित किया। जब रोगियों में चमत्कारिक परिणाम पाया तो मैं झूम उठा। मेरे जीवन में शायद ही इतना आनंद मुझे पहली बार मिला। मैंने मन में निश्चय कर लिया है कि हर एक स्वास्थ्य प्रेमी एवं रोगियों को इस किताब की जानकारी देकर, उनको पढ़ने और आचरण में लाने को प्रेरित करूँगा।

डाॅ. विरचन्द हरकचन्द मंडलेचा (B.A.M.S.), नूतन क्लिनिक, सर्राफ लेन, देवला, जिला-नाशिक (महा.)

आज हमारा देश पश्चिमी संस्कृति में रंगा जा रहा है। इसे रोकने के लिये  यह पुस्तक एक बहुत अच्छा कदम है। आज यदि हमें एक स्वस्थ समाज, स्वस्थ देश का निर्माण करना है तो आरोग्य आपका पुस्तक की चिकित्साएँ अपनाकर हम ऐसा कर सकते हैं। इसमें बताई गई चिकित्सा विधियाँ अहिंसात्मक है। आज के वैज्ञानिक युग में भारत को पश्चिमी संस्कृति से बचाने का एवं हर व्यक्ति को स्वस्थ रखने का एक ही उपाय है- आरोग्य आपका का स्वाध्याय।

-श्री अनिल कुमार मिश्रा (R.H.J.S.), सी/91, दुर्गापथ, अम्बावाड़ी, जयपुर-302023 (राज.)

मेरे 8 वर्षीय पुत्र प्रसन्न के पेशाब में पिछले 15 दिन से रक्त आ रहा था। डाॅक्टर एस.डी. शर्मा व श्री एस. के. पारख को दिखाया एवं सभी टेस्ट कराये। इसके पेशाब में I.G.A. Level 4.14 था। डाॅक्टरों ने कहा इस रोग का उपचार हेतु गुर्दा निकालना पड़ सकता है। कोई दूसरा इलाज नहीं है। मुझे इसके गुर्दे खराब होने की चिन्ता थी। आपकी पुस्तक में पृष्ठ 173 पर इसके इलाज की विधि व पृष्ठ 177 पर चित्र सं. 76 पर चुम्बक लगाने की विधि बताई गई थी। मैंने आपसे चुम्बक मंगवाकर उसका इलाज किया। 48घण्टों में ही फर्क पड़ना शुरु हो गया व 10 दिनों के इलाज से बिल्कुल नाॅर्मल हो गया। मैंने दूबारा उसका टेस्ट कराया तो नाॅर्मल आया। डाॅक्टर भी इसकी रिपोर्ट देखकर आश्चर्यचकित है वह पुस्तक के एवं इलाज के बारे में मुझसे जानकारी ली है।

-श्रीमती रिंकु देवल सुपुत्री श्री सी.डी. देवल (भूतपूर्व एम.एल.ए), जयपुर (राज.)

आज जहाँ हर व्यक्ति बदलते जीवन शैली में बीमारियों का शिकार हो रहा है। वहाँ ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन व उससे भी बढ़कर उसे आम व्यक्ति के सामने प्रस्तुत करना एक अभूतपूर्व कार्य है। इस पुस्तक में न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी चिकित्सा पद्धति को भी महत्त्व व सम्मान दिया गया है। दवाओं के दुष्प्रभावों से बचने के लिए, यदि इन पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता है तो व्यक्ति अपने शरीर की असीम शक्तियों का सदुपयोग कर देश को एक स्वस्थ समाज दे सकता है।                                              

-संदीप सिंह सोलंकी (M.B.A.), जोधपुर (राज.)

स्वस्थ जीवन जीने के लिये जैसे शुद्ध हवा, पानी, भोजन आदि की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार स्वस्थ जीवन जीने के लिये प्रेरित करने वाले साहित्य की भी अति आवश्यकता होती है। यह कृति उस आवश्यकता को पूर्णतः पूरा करती है। मुझे आशा है कि मेरी ही तरह अन्य लोगों के जीवन में भी यह कृति दीपक की भांति रोशनी प्रदान करेगी और उन्हें स्वस्थ, संतुलित एवं संयमित जीवन जीने का अवसर प्रधान करेगी।

- डाॅ. सुधा जैन (Ph.D.), पाष्र्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी (उत्तरप्रदेश)

हमारे ही शरीर में रोगों का उपचार संभव होता है। इस अमृत तुल्य सत्य को किताब के माध्यम से हम समझ चुके हैं कि हमारा यह शरीर किन-किन अद्भुत चीजों का भंडार है? जिसमें अणु से अणु बात को भी मन में धार कर शरीर का मुख्य ध्येय आरोग्य को प्राप्त हो सकते हैं।

-डाॅ. संदीप एस. जैन (B.A.M.S.), वर्धमान हाॅसपीटल, बोडवाड (महा.)

4 अक्टूबर 2005 को सायंकाल मुझे एपेन्डिसाईटिस का गम्भीर रोग हुआ जो सोनोग्राफी से मालूम चला। डाॅक्टरों ने तुरन्त शल्य चिकित्सा करवाने का परामर्श दिया। परन्तु जब मैंने डाॅ. चोरडिया से सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा यदि आपको मेरे उपचार से प्रातःकाल तक आराम न मिले तो आप शल्य चिकित्सा के बारे में निर्णय ले लेना। रात्रि में उनके उपचार में मुझे तुरंत राहत मिलना प्रारम्भ हो गया और दो दिन में बिना शल्य चिकित्सा के मैं पूर्ण स्वस्थ हो गया। पुनः सोनोग्राफी करवाने पर यह तथ्य स्पष्ट हो गया।

-आर.एम.कोठारी (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.), चौपासनी रोड़, जोधपुर

किसी ने सत्य ही कहा है कि अच्छी पुस्तकें जीवन्त देव प्रतिमाएँ हैं, जिनकी अध्ययन रूपी आराधना एवं उपासना से प्रकाश व उल्लास मिलता है। प्रस्तुत पुस्तकें आरोग्य आपका विषय वस्तु, भाषा, व्याकरण, चित्र, उदाहरण सहित सभी तथ्यों से परिपूर्ण है। इसके प्रसंग व उदाहरण इतने सरल और सहज है कि अध्ययनकत्र्ता को लगता है कि वह पढ नहीं बल्कि चलचित्र देख व समझ रहा है। जन-जन को आरोग्य प्राप्त करने और न केवल आरोग्य अपितु अध्यात्म के बारे में पुस्तक के पृष्ठ 188 से 203 तक जो कुछ लिखा उसका एक-एक शब्द धारणयोग्य व मननयोग्य है। इस पुस्तक को मैंने न जाने कितनी बार पढ़ डाला है, हर बार कुछ न कुछ नया पाया। जितनी बार पढ़ा, जिज्ञासा और बढ़ी। लेखक होने के नाते मैं इस तथ्य से परिचित हूँ कि अच्छा लिखने के लिये पर्याप्त अनुभव, गहन अध्ययन, विषय और भाषा पर गहन पकड़ आवश्यक है। कितनी हैरत की बात है कि आज का यह तथाकथित मानव आधुनिक चिकित्सा की चकाचौन्ध में अपना सर्वत्र लुटाने पर तुला है, उसे न तो खाने के नियम पता है न पानी के और तो और उसे ढंग से श्वास लेना भी नहीं आता, न ढंग से चलना, न बैठना आता है। और तो और वह रोगी होता है अपने कारणों से और स्वस्थ होना चाहता है प्रकृति के विपरीत, हिंसात्मक साधनों को अपनाकर आधुनिक चिकित्सा द्वारा। भला बबूल का बीज बोकर आम कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

                प्रस्तुत पुस्तक का यूं तो हर अध्याय प्रभावी है परन्तु सबसे प्रभावी है पृष्ठ 27 से 34 तक श्रीमान् लेखक का स्वकथन जिसका एक-एक वाक्य और शब्द चिन्तन योग्य है। आपका यह कथन किसी को दुःख देकर सुख और शान्ति नहीं मिल सकती। यह प्रकृति का शाश्वत नियम भी है। इसलिये कर्मों को भोगते समय नहीं, कर्मो को करते समय भी उसके फलों से नहीं बचा जा सकता। पृष्ठ 105 पर श्वसन का सही तरीका, पृष्ठ 108 पर जल और स्वास्थ्य तथा भोजन में भाव का प्रभाव भी आश्चर्यजनक लगा। सत्य तो यह है कि इतनी साधारण बातें इस असाधारण पुस्तक से जान पया। प्रस्तुत पुस्तक मात्र 360 पृष्टों या 177 चित्रों का संकलन नहीं वरन हर स्वास्थ्य प्रेमी के घर में रखने का धर्म ग्रंथ है। मेरा सौभाग्य है कि मैंने ऐसे सम्माननीय लेखक को विभिन्न शिविर में सुना, देखा व परखा। आपने जो कुछ कहा या लिखा उसमें तनिक भी अन्तर नहीं है, आपकी कथनी व करनी समान है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम समिति का सदस्य होने के नाते मेरा प्रयास रहेगा कि प्रस्तुत पुस्तक के कुछ अध्याय कक्षा नवमीं एवं दसवीं में स्वास्थ्य शिक्षा में सम्मिलित हों ताकि स्वास्थ्य का प्रकाश व सर्वागीण विकास के वास्तविक लक्ष्य की प्राप्ति हो सके।                                                         

-अनिल कुमार सांखला M.Sc.(Phy.), M.Ed., CLC

सदस्य एवं लेखक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान पाठ्यक्रम समिति, 297,पावटा बी रोड़, जोधपुर (राज.)

यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आरोग्य आपका पुस्तक पढ़ने का अवसर मिला। मैंने पहली बार जाना कि स्वावलम्बी चिकित्सा अधिक मौलिक, वैज्ञानिक व प्रभावशाली होती है। जिसमें पूर्ण शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को एक इकाई के रूप में मान कर उपचार किया जाता है। यह पुस्तक स्वस्थ रहने की कुंजी है। कोई व्यक्ति बीमार पड़ना नहीं चाहता। कोई व्यक्ति दवाई खाना नहीं चाहता। अतः मेरी राय में जो भी व्यक्ति यह पुस्तक पढ़े, वह अपने शुभचिन्तकों, मित्रों, रिश्तेदारों को इसकी जरूर जानकारी दें।

-शमीम अख्तर RAS (एम.बी.ए., एल.एल.बी), अतिरिक्त निदेशक, साक्षरता एवं सतत शिक्षा विभाग,

मस्जिद के पास, सब्जी मण्डी, जौहरी बाजार, जयपुर (राज.)

संसार में कोई भी दो रोगी एक समान नहीं हो सकते। इस मूल सिद्धान्त पर आधारित यह ग्रन्थ स्वास्थ्य व चिकित्सा के क्षेत्र में चार आर्य सत्य यथा- रोग, रोग के कारण, निदान व निदान का उपाय, सम्यक् रूप से संश्लेशण-विश्लेषण कर अद्भुत रूप से प्रस्तुतिकरण करती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही, सनातन सिद्धान्तों की उपेक्षा, जीवन शक्ति का क्षय करने वाली पाश्चात्य संस्कृति में लिप्त मानव स्वास्थ्यवर्धक परिस्थिति की ओर किस प्रकार आरूढ़ होकर स्वयं को निरोगी रख सकता है। यह पुस्तक तमसो मा ज्योतिर्गमयः का कार्य करती है। पुस्तक में वर्णित दाणा मेथी चिकित्सा, हास्य चिकित्सा, नाभि खिंसकने पर खिंचाव चिकित्सा प्रयोग मैंने स्वयं व पारिवारिक सदस्य पर करने पर आश्चर्यजनक रूप से लाभान्वित हुआ वह गौरवान्वित महसूस कर रह हूँ। यह पुस्तक संग्रहणीय, स्कूली शिक्षा के पाठ्य पुस्तक में सम्मिलित होने योग्य व नोबल पुरस्कार से सम्मानित होने योग्य है।

                                                                                   -डाॅ. दलवीर सिंह ढड्ढा RAS, जोधपुर (राज.)

श्री चंचलमल जी चोरडिया द्वारा लिखित आरोग्य आपका पुस्तक स्वावलम्बी, अहिंसक, सहज, सुलभ चिकित्सा पद्धतियों का एक अनुकरणीय संदेश है। यह पुस्तक मौलिक चिकित्सा के क्षेत्र में गागर में सागर है। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा, स्वर, सुजोक, चुम्बक, रंग, शिवाम्बु, एक्यूप्रेशर पद्धतियों को सरल, सटीक व प्रभावकारी ढंग से चित्रित किया गया है। इस पुस्तक में वर्णित प्रत्येक इलाज प्रभावशाली है। मेरे द्वारा मेथी चिकित्सा का विशेष रूप से प्रयोग किया गया, जिसके आश्चर्यजनक परिणाम आये।

-नरेन्द्र सिंह ढढा (R.H.J.S.), अपर सेशन न्यायाधीश, उदयपुर (राज.)

स्वस्थ रहे या रोगी फैसला आपका, स्वस्थ रहने के लिये मार्गदर्शक है आरोग्य आपका

                दवा खाये बिना भी कोई चिकित्सा हो सकती है, यह भले ही हमें अजूबा लगे किन्तु इस पुस्तक में ऐसी कई स्वावलम्बी अहिंसात्मक चिकित्सा पद्धतियाँ बताई गई है, जिनमें औषधि का सेवन नहीं होता, फिर भी उनका प्रभाव रोग निवारण में अचूक एवं आश्चर्यजनक होता है। इतनी सारी अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की खोज करना व उनको संग्रहित कर पुस्तक बनाना सामान्य कार्य नहीं है। इस पुस्तक ने इन सभी अभावों को दूर कर एक नई दिशा दी है। लेखक ने इस पुस्तक में स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियों पर अधिकाधिक जोर इसलिये दिया है, क्योंकि ये चिकित्सा पद्धतियाँ अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावशाली है।

-डाॅ. श्रीमती कमल दत्त (R.H.J.S.), अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, भरतपुर-321001 (राज.)

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